॥महाषोढान्यास:॥
महाषोढान्यास तांत्रिक परंपरा में एक महत्वपूर्ण अभ्यास है, विशेष रूप से श्री विद्या पूजा के भीतर, जिसका उद्देश्य भक्त को देवता और ब्रह्मांड के साथ एकता का अनुभव कराना है। यह एक अनुष्ठानिक अभ्यास है जिसमें शरीर और मन को शुद्ध करने के लिए मंत्रों और प्रतीकात्मक इशारों का उपयोग करके देवता की ऊर्जाओं के साथ कल्पना करना और मानसिक रूप से ऐक्य प्राप्त करते है। इस अभ्यास को आत्मसाक्षात्कार और मुक्ति प्राप्त करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण माना जाता है।
॥चक्र-आवरणशक्ति न्यास:॥
॥मूलाधारे॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं खं गं घं ङं अनन्तकोटि भूचरी कुलसहितायै आं क्षां मङ्गलाम्बादेव्यै आं क्षां ब्रह्माण्यम्बादेव्यै अनन्तकोटि भूचरादि कुलसहितायै अं क्षं मङ्गलनाथाय अं क्षं असिताङ्ग भैरवनाथाय नम:।
॥स्वाधिष्ठाने॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: चं छं जं झं ञं अनन्तकोटि खेचरीकुलसहितायै ईं लां चर्चिकाम्बादेव्यै ईं लां माहेश्वर्यम्बादेव्यै अनन्तकोटि वेताल कुलसहिताय इं लं चर्चिकनाथाय इं लं रूरू भैरवनाथाय नम:।
॥मणिपूरके॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: टं ठं डं ढं णं अनन्तकोटि पातालचरी कुलसहितायै ऊं हां योगेश्वर्यम्बादेव्यै ऊं हां कौमार्याम्बादेव्यै अनन्तकोटि पिशाच कुलसहिताय उं हं योगेश्वरनाथाय उं हं चण्ड भैरवनाथाय नम:।
॥अनाहते॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: तं थं दं धं नं अनन्तकोटि दिक्चरी कुलसहितायै ॠं सां हरसिद्धाम्बादेव्यै ॠं सां वैष्णव्यम्बादेव्यै अनन्तकोट्यपस्पार कुलसहिताय ऋं सं हरसिद्धनाथाय ऋं सं क्रोध भैरवनाथाय नम:।
॥विशुद्धौ॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: पं फं बं भं मं अनन्तकोटि सहचरी कुलसहितायै ॡं षां भट्टिन्यम्बादेव्यै ॡं षां वाराह्याम्बादेव्यै अनन्तकोटि ब्रह्मराक्षस कुलसहिताय ऌं षं भट्टिनाथाय ऌं षं उन्मत्त भैरवनाथाय नम:।
॥आज्ञायां॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: यं रं लं वं अनन्तकोटि गुरुचरी कुलसहितायै ऐं शां किलिकिल्यम्बादेव्यै ऐं शां इन्द्राण्यम्बादेव्यै अनन्तकोटि चेटक कुलसहिताय एं शं किलिकिलिनाथाय एं शं कपाली भैरवनाथाय नम:।
॥भाले॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: शं षं सं हं अनन्तकोटि वनचरी कुलसहितायै औं वां कालरात्र्यम्बादेव्यै औं वां चामुण्डादेव्यै अनन्तकोटि प्रेतकुलसहिताय ओं वं कालरात्रिनाथाय ओं वं भीषण भैरवनाथाय नम:।
॥ब्रह्मरन्ध्रे॥
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ळं क्षं अनन्तकोटि जलचरी कुलसहितायै अ: लां भीषणाम्बादेव्यै अ: लां महालक्ष्म्याम्बादेव्यै अनन्तकोटि कूष्माण्ड कुलसहितायै अं लं भीषण नाथाय अं लं संहार भैरवनाथाय नम:।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं समस्त मातृकाभैरवाधिदेवतायै शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ सर्वाङ्गे। इति व्यापकं न्यास कुर्यात्।
॥पञ्चवक्र न्यास:॥
॥विनियोग:॥
(नमस्कार) ॐ अस्य श्री महाषोढान्यासस्य (Head) ब्रह्माऋषि: (Mouth) गायत्रीछन्द:
(Heart) श्रीमद् अर्धनारीश्वरी देवता (नमस्कार) श्रीबगलाविद्याङ्गत्वेन न्यासे
(अंजलि) विनियोग:।
॥न्यासम्॥
(Thumb) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हौं ईशानाय नम: अंगुष्ठयो:।
(Index) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हैं तत्पुरुषाय नम: तर्जन्या:।
(Middle) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हुं अघोराय नम: मध्यमयो:।
(Ring) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हिं वामदेवाय नम: अनामिकयो:।
(Little) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं सद्योजाताय नम: कनिष्ठिकयो:।
(Head) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हौं ईशानाय नम: मूर्ध्नि:।
(Mouth) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हैं तत्पुरुषाय नम: मुखे:।
(Heart) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हुं अघोराय नम: हृदये:।
(Genital) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हिं वामदेवाय नम: गुह्ये:।
(Feet) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं सद्योजाताय नम: पादयो:।
(Head) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हौं ईशानाय उर्ध्ववक्त्राय नम: मूर्ध्नि।
(Mouth) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हैं तत्पुरुषाय पूर्ववक्त्राय नम: मुखे।
(Right-ear) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हुं अघोराय दक्षिणवक्त्राय नम: दक्षकर्णे।
(Left-ear) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हिं वामदेवाय उत्तरवक्त्राय नम: वामकर्णे।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं सद्योजाताय पश्चिमवक्त्राय नम: चोरकूपे।
॥ध्यानम्॥
पञ्चवक्त्रं चतुर्बाहुं सर्वाभरणभूषिताम्। चन्द्रसूर्यसहस्त्राभं शिवशक्त्ययात्मकं भजे॥
॥प्रपञ्चन्यास:॥
(Head) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं प्रपञ्चरूपायै श्रियै नम: शिरसि।
(Mouth) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: आं द्वीपरूपायै मायायै नम: मुखवृते।
(Right-eye) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: इं जलधिरूपायै कमलायै नम: दक्षनेत्रे।
(Left-eye) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ईं गिरिरूपायै विष्णुवल्लभायै नम: वामनेत्रे।
(Right-ear) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: उं पत्तनरूपायै पद्मधारिण्यै नम: दक्षकर्णे।
(Left-ear) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऊं पीठरूपायै समुद्रतनयायै नम: वामकर्णे।
(Right-nostril) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऋं क्षेत्ररूपायै लोकमात्रे नम: दक्षनासापुटे।
(Left-nostril) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॠं वनरूपायै कमलवासिन्यै नम: वामनासापुटे।
(Right-cheek) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऌं आश्मरूपायै इन्द्रिरायै नम: दक्षगण्डे।
(Left-cheek) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॡं गुहारूपायै मायायै नम: वामगण्डे।
(Upper-lip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: एं नदीरूपायै रमायै नम: ऊर्ध्वोष्ठे।
(Lower-lip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऐं चत्वाररूपायै पद्मायै नम: अधरोष्ठे।
(Upper-teeth) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ओं उद᳭भिज्जरूपायै नारायण प्रियायै नम: ऊर्ध्वदन्तपंक्तौ।
(Lower-teeth) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: औं स्वेदजरूपायै सिद्धलक्ष्म्यै नम: अधोदन्तपंक्तौ।
(Tongue-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं अण्डजरूपायै राजलक्ष्म्यै नम: जिह्वाग्रे।
(Throat) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अ: जरायुजरूपायै महालक्ष्म्यै नम: कण्ठे।
(Right-arm-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं लवरूपायै आर्ययै नम: दक्षबाहुमूले।
(Right-elbow) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: खं त्रुटिरूपायै उमायै नम: दक्षकूर्परे।
(Right-wristband) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: गं कलारूपायै चण्डिकायै नम: दक्षमणिबन्धे।
(Right-fingers-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: घं काष्ठारूपायै दुर्गायै नम: दक्षकरांगुलिमूले।
(Right-fingers-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ङं निमेषरूपायै शिवायै नम: दक्षकरांगुल्यग्रे।
(Left-arm-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: चं श्वासरूपायै अपर्णायै नम: वामबाहुमूले।
(Left-elbow) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: छं घाटिकारूपायै अम्बिकायै नम: वामकर्पूरे।
(Left-wristband) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: जं मुहुर्तरूपायै सत्यै नम: वाममणिबन्धे।
(Left-fingers-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: झं प्रहररूपायै ईश्वर्यै नम: वामकरांगुलिमूले।
(Left-fingers-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ञं दिवसरूपायै शाम्भव्यै नम: वामकरांगुल्यग्रे।
(Right-thigh-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: टं सन्ध्यारूपायै ईशान्यै नम: दक्षोरूमूले।
(Right-knee) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ठं रात्रिरूपायै पार्वत्यै नम: दक्षजानूनि।
(Right-ankle) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: डं तिथीरूपायै सर्वमङ्गलायै नम: दक्षगुल्फे।
(Right-toes-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ढं वाररूपायै दाक्षाण्यै नम: दक्षपादाङ्गुलिमूले।
(Right-toes-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: णं नक्षत्ररूपायै हैमवत्यै नम: दक्षपादांगुल्यग्रे।
(Left-thigh-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: तं योगरूपायै महामायायै नम: वामोरूमूले।
(Left-knee) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं थं करणरूपायै महेश्वर्यै नम: वामजानुनि।
(Left-ankle) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: दं पक्षरूपायै मृडान्यै नम: वामगुल्फे।
(Left-toes-root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: धं मांसरूपायै इन्द्राण्यै नम: वामपादांगुलिमूले।
(Left-toes-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: नं शशिरूपायै सर्वाण्यै नम: वामपादांगुल्यग्रे।
(Right-side) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: पं ऋतुरूपायै परमेश्वर्यै नम: दक्षपार्श्वे।
(Left-side) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: फं अयनरूपायै काल्यै नम: वामपार्श्वे।
(Back) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: बं वत्सररूपायै कात्यायन्यै नम: पृष्ठे।
(Naval) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: भं युगरूपायै गौर्यै नम: नाभौ।
(Stomach) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: मं प्रलयरूपायै भवान्यै नम: जठरे।
(Heart) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: यं पञ्चभूतरूपायै ब्राह्मयै नम: हृदये।
(Right-shoulder) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: रं पञ्चतन्मात्ररूपायै बागिश्वर्यै नम: दक्षस्कन्धे।
(Neck) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: लं पञ्चकर्मेन्द्रियरूपायै वाण्यै नम: गलपृष्ठे-ककुदि।
(Left-shoulder) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: वं पञ्चज्ञानेन्द्रियरूपायै सावित्र्यै नम: वामस्कन्धे।
(Heart-to-Right-fingers-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: शं पञ्चप्राणरूपायै सरस्वत्यै नम: हृदयादि-दक्षकरांगुल्यन्तम्।
(Heart-to-Left-fingers-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: षं गुणत्रयरूपायै गायत्र्यै नम: हृदयादि-वामकरांगुल्यन्तम्।
(Heart-to-Right-toes-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: सं अंतकरण चतुष्टयरूपायै वाक्प्रदायै नम: हृदयादि-दक्षपादांगुल्यन्तम्।
(Heart-to-Left-toes-tip) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं अवस्था चतुष्टयरूपायै शारदायै नम: हृदयादि-वामपादांगुल्यन्तम्।
(Heart-to-Genital) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ळं सर्वधातुरूपायै भारत्यै नम: हृदयादि-गुह्यान्तम्।
(Heart-to-Crown) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: क्षं दोषत्रयरूपायै विद्यात्मिकायै नम: हृदयादिमूर्धान्तम्।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं सकल प्रपञ्चाधिदेवतायै शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ सर्वाङ्गे। इति व्यापकं न्यास कुर्यात्। इति प्रपञ्चन्यास:।
॥भुवनन्यास:॥
(Feet) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं अतललोक-निलय शतकोटि गुह्याद्य योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: पादयो:।
(Ankle) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ईं उं ऊं वितललोक निलय शतकोटि गुह्यतरांत योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: गुल्फयो:।
(Thighs) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऋं ॠं ऌं सुतललोक निलय शतकोटि गुह्याचिन्त्य योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: जंघयो:।
(Shin-bone) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॡं एं ऐं महातललोक निलय शतकोटि महागुह्येच्छा योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: जान्वो।
(Thighs) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ओं औं तलातललोक निलय शतकोटि परमगुह्येच्छा योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: ऊर्वो:।
(Genital) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं अ: रसातललोक निलय शतकोटि रहस्यज्ञान योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: गुह्ये।
(Root) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं पाताललोक भूर्लोक निलय शतकोटि रहस्यतर क्रिया डाकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: मूलाधारे।
(Bladder) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: टं ठं डं ढं णं भुवर्लोक निलय शतकोटि अतिरहस्य राकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्वाधिष्ठाने।
(Naval) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: तं थं दं धं नं स्वर्लोक निलय शतकोटि परमरहस्य लाकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: मणिपूरे।
(Heart) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: पं फं बं भं मं महर्लोक निलय शतकोटि गुप्त काकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: अनाहते।
(Throat) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: यं रं लं वं जन: लोक निलय शतकोटि गुप्ततर साकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: विशुद्धौ।
(Third-eye) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: शं षं सं हं तपोलोक निलय शतकोटि अतिगुप्त हाकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: आज्ञायाम्।
(Crown) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ळं क्षं सत्यलोक निलय शतकोटि महागुप्त याकिनी योगिनी मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: ब्रह्मरन्ध्रे।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं
सकलभुवाधिपतायै मूलदेवतायुताधार शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ सर्वाङ्गे। इति व्यापकं कुर्यात्। इति भुवनन्यास:।
॥मूर्तिन्यास:॥
(Head-शिरसि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं केशवाय-अक्षर-शक्त्यै नम:।
(Mouth-मुखे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: आं नारायणाय-आद्य-शक्त्यै नम:।
(Right-hand-दक्षिणांसे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: इं माधवाय-इष्टदायै नम:।
(Left-hand-वामांसे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ईं गोविन्दाय-ईशान्यै नम:।
(Right-side-दक्षपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: उं विष्णवे उग्रायै नम:।
(Left-side-वामपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऊं मधुसूदनाय-उर्ध्वनयनायै नम:।
(Right-waist-दक्षकट्यां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऋं त्रिविक्रमाय ऋध्यै नम:।
(Left-waist-वामकट्यां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॠं वामनाय रूपिण्यै नम:।
(Right-thigh-bone-दक्ष-उरु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऌं श्रीधराय लुप्तायै नम:।
(Left-thigh-bone-वाम-उरु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॡं हृषीकेशाय लूनदोषायै नम:।
(Right-knee-दक्षजानुनि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: एं पद्मनाभायै कनायिकायै नम:।
(Left-knee-वामजानुनि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऐं दामोदराय कारिण्यै नम:।
(Right-thigh-दक्षजंघायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ओं वासुदेवाय उघवत्यै नम:।
(Left-thigh-वामजंघायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: औं सङ्कर्षणायौर्वकामायै नम:।
(Right-foot-दक्षपादे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं प्रद्युम्नाय-अञ्ञनप्रभायै नम:।
(Left-foot-वामपादे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अ: अनिरूद्धाय-अस्थिमालाधरायै नम:।
(Right-foot-toes-tips-to-root-of-right-thigh-bone-दक्षपादाग्रादूरूमूलपर्यन्तम्) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं भं भवाय कराभायै नम:।
(Left-foot-toes-tips-to-root-of-left-thigh-bone-वामपादाग्रादूरूमूलपर्यन्तम्) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: खं वं शर्वाय खगलबायै नम:।
(Right-side-दक्षपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: गं फं हराय गरिमफलप्रदायै नम:।
(Right-side-वामपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: घं पं पशुपतये घोर पादायौ नम:।
(Right-side-uterus-दक्षदोर्मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ङं मं उग्राय पंक्तिवासायै नम:।
(Left-side-uterus-वामदोर्मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: चं धं महादेवाय चन्द्रार्धधारिण्यै नम:।
(Throat) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: छं दं भीमाय छन्दोमय्यै नम:।
(Face-वदने) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: जं थं ईशानाय जगत्स्थानायै नम:।
(Right-ear-दक्षकर्णे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: झं तं तत्पुरुषाय झंकृत्यै नम:।
(Left-ear-वामकर्णे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ञं णं अघोराय ज्ञानदायै नम:।
(Forehead-भाले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: टं ढं सद्योजाताय टंकढक्कधरायै नम:।
(Head-शिरसि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ठं डं वामदेवाय टं कृतिडामर्यै नम:।
(Root-मूलाधारे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: यं ब्रह्मणे यक्षिण्यै नम:।
(Bladder-स्वाधिष्ठाने) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: रं प्रजापतये रञ्ञिण्यै नम:।
(Naval-मणिपूरके) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: लं वेधसे लक्ष्म्यै नम:।
(Heart-अनाहते) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: वं परमेष्ठिने वज्रिण्यै नम:।
(Throat-विशुद्धौ) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: शं पितामह शशिधरायै नम:।
(Third-eye-आज्ञायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: षं विधात्रे षडाधारालयायै नम:।
(Crown-अर्धेन्दौ) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: सं पिरञ्चये सर्वनायिकायै नम:।
(Crown-रोधिन्यां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं स्त्रष्ट्रे हसिताननायै नम:।
(Crown-नादे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ळं चतुराननाय ललितायै नम:।
(Crown-नादान्ते) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: क्षं हिरण्यगर्भाय क्षमायै नम:।
इति विन्यस्य।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं सकलत्रिमूर्तर्त्यात्मिकायै शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ सर्वाङ्गे। इति व्यापकं न्यास कुर्यात्। इति मूर्तिन्यास:।
॥मंत्रन्यास:॥
(Root-मूलाधारे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं एकलक्षकोटिभेद प्रणवाद्येकाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै एककूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Bladder-स्वाधिष्ठाने) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ईं उं ऊं द्विलक्षकोटिभेद संसादिद्विक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै द्विकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Naval-मणिपूरके) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऋं ॠं ऌं त्रिलक्षकोटिभेद वह्न्यादित्र्यक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै त्रिकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Heart-अनाहते) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ॡं एं ऐं चतुर्लक्षकोटिभेद चन्द्रादिचतुरक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै चतुष्कूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Throat-विशुद्धे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ओं औं अं अ: पञ्चलक्षकोटिभेद सृयोदिपञ्चाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै पञ्चकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Third-eye-आज्ञायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं खं गं षड᳭लक्षकोटिभेद सूर्यादि षटाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै षट᳭कूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-बिन्दु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: घं ङं चं सप्तलक्षकोटिभेद गणपत्यादि सप्ताक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै सप्तकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-अर्धेन्दु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: छं जं झं अष्टलक्षकोटिभेद बटुकाद्य् अष्टाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै अष्टकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-रोधिनी) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ञं टं ठं नवलक्षकोटिभेद ब्रह्मादि नवाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै नवकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-नाद) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: डं ढं णं दक्षकलक्षकोटिभेद विष्णवादि दशक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै दशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-नादान्त) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: तं थं दं एकादशलक्षकोटिभेद रुद्राद्य् एकादशाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै एकादशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-शक्ति-कौण्डिली) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: धं नं पं द्वादशलक्षकोटिभेद वाण्यादि द्वादशाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै द्वादशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-व्यापिनी) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: फं बं भं त्रयोदशलक्षकोटिभेद लक्ष्म्यादि त्रयोदशाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै त्रयोदशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-समना) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: मं यं रं चतुर्दशलक्षकोटिभेद गौर्यादि चतुर्दशाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै चतुर्दशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-उन्मनी) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: लं वं शं पञ्चलक्षकोटिभेद दुर्गादि पञ्चदशाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै पञ्चदशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-ध्रुवमण्डल) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: षं सं हं ळं क्षं षोड᳭शलक्षकोटिभेद त्रिपुरादिषोड᳭शाक्षरात्मक-अखिल मंत्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै षोड᳭शकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं सकलमंत्राधिदेवतायै शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ सर्वाङ्गे। इति व्यापकं न्यास कुर्यात्। इति मन्त्रन्यास:।
॥देवतान्यास:॥
(Right-foot-दक्षपादे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं सहस्त्रकोटि ऋषिकुल सेवितायै निवृत्यम्बादेव्यै नम:।
(Left-foot-वामपादे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: इं ईं सहस्त्रकोटि योगिनीकुल सेवितायै प्रतिष्ठाम्बादेव्यै नम:।
(Right-ankle-दक्षगुल्फे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: उं ऊं सहस्त्रकोटि तपस्विकुल सेवितायै विद्याम्बादेव्यै नम:।
(Left-ankle-वामगुल्फे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऋं ॠं सहस्त्रकोटि शान्तकुल सेवितायै शान्ताम्बादेव्यै नम:।
(Right-thigh-दक्षजंघायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ऌं ॡं सहस्त्रकोटि मुनिकुल सेवितायै शान्त्यतीताम्बादेव्यै नम:।
(Left-thigh-वामजंघायां) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: एं ऐं सहस्त्रकोटि देवताकुल सेवितायै हृल्लेखाम्बादेव्यै नम:।
(Right-knee-दक्षजानुनि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ओं औं सहस्त्रकोटि राक्षसकुल सेवितायै गगनाम्बादेव्यै नम:।
(Left-knee-वामजानुनि) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं अ: सहस्त्रकोटि विद्याधरकुल सेवितायै रक्तम्बादेव्यै नम:।
(Right-thigh-bone-दक्ष-उरु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: कं खं सहस्त्रकोटि सिद्धकुल सेवितायै महोच्छुष्माम्बादेव्यै नम:।
(Left-thigh-bone-वाम-उरु) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: गं घं सहस्त्रकोटि साध्यकुल सेवितायै करालिकाम्बादेव्यै नम:।
(Root-of-right-thigh-bone-pelvis-bone-दक्ष-उरु-मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: ङं चं सहस्त्रकोटि अप्सर:कुल सेवितायै जयाम्बादेव्यै नम:।
(Root-of-left-thigh-bone-pelvis-bone-वाम-उरु-मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: छं जं सहस्त्रकोटि गन्धर्वकुल सेवितायै विजयाम्बादेव्यै नम:।
(Right-side-दक्षपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: झं ञं सहस्त्रकोटि गुह्यककुल सेवितायै अजिताम्बादेव्यै नम:।
(Left-side-वामपार्श्वे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: टं ठं सहस्त्रकोटि यक्षकुल सेवितायै अपराजिताम्बादेव्यै नम:।
(Right-breast-दक्षस्तने) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: डं ढं सहस्त्रकोटि किन्नरकुल सेवितायै वामाम्बादेव्यै नम:।
(Left-breast-वामस्तने) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: णं तं सहस्त्रकोटि पन्नगकुल सेवितायै ज्येष्ठाम्बादेव्यै नम:।
(Right-side-uterus-दक्षदोर्मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: थं दं सहस्त्रकोटि पितृकुल सेवितायै रौद्राम्बादेव्यै नम:।
(Left-side-uterus-वामदोर्मूले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: धं नं सहस्त्रकोटि गणेश्वरकुल सेवितायै छायाम्बादेव्यै नम:।
(Right-arm-दक्षभुजे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: पं फं सहस्त्रकोटि भैरवकुल सेवितायै कुण्डलिन्यम्बादेव्यै नम:।
(Left-arm-वामभुजे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: बं भं सहस्त्रकोटि वटुककुल सेवितायै काल्यम्बादेव्यै नम:।
(Right-hand-दक्षांसे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: मं यं सहस्त्रकोटि क्षेत्रेशकुल सेवितायै कालरात्र्यम्बादेव्यै नम:।
(Left-hand-वामांसे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: रं लं सहस्त्रकोटि प्रथमकुल सेवितायै भगवत्यम्बादेव्यै नम:।
(Right-ear-दक्षकर्णे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: वं शं सहस्त्रकोटि ब्रह्मकुल सेवितायै सर्वेश्वर्यम्बादेव्यै नम:।
(Left-ear-वामकर्णे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: षं सं सहस्त्रकोटि विष्णुकुल सेवितायै सर्वज्ञात्र्यम्बादेव्यै नम:।
(Forehead-भाले) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: हं ळं सहस्त्रकोटि रुद्रकुल सेवितायै सर्वकत्र्यम्बादेव्यै नम:।
(Crown-ब्रह्मरन्ध्रे) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: क्षं सहस्त्रकोटि चराचरकुल सेवितायै कुलशक्त्यम्बादेव्यै नम:।
व्यापक न्यास में किसी भी अंग को स्पर्श किये बिना सर्वांग में मंत्र न्यास करते है।
(Full-body) ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ऐं ह्सौ: स्हौ: अं आं इं ईं उं ऊं ऋं ॠं ऌं ॡं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङं चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं समस्त देवताधिपायै शक्त्यम्बादेव्यै नम: स्हौ: ह्सौ: ऐं श्रीं क्लीं ह्रीं ॐ। इति व्यापकं कुर्यात्। इति देवतान्यास:।
इति महाषोढान्यास:॥
